हिज़ाब तेरे चेहरे पर आ मैं सजा दूँ
बाग़ ए इरम की तुझे मैं हूर बना दूँ,
कभी दाग़ आये न आँचल में तेरी
आ अपने रूह के दामन में छुपा दूँ,
हो अगर जो कभी राहे दुश्वार तेरी
राहो में तेरी अपनी पलके बिछा दूँ,
आज़माना जो चाहे तू इश्क़ हमारा
कह के देख ख़ुद को सूली चढ़ा दूँ,
वार कर के सब तुम पे ऐ ज़रीन
आ तुझे मैं हर एक दर्द की दवा दूँ..!!
~नवाब ए हिन्द
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