ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा
ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही
ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही
मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कुंज ए चमन मुझ से छीन
फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के यारो ये कैसी हवा है अब के ? दोस्त बिछड़े हैं
पत्थर का वो शहर भी क्या था शहर के नीचे शहर बसा था, पेड़ भी पत्थर फूल भी
सुनाता है कोई भोली कहानी महकते मीठे दरियाओं का पानी, यहाँ जंगल थे आबादी से पहले सुना है
साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन क्यूँ है ये शोर बपा ग़ौर से सुन, दिन के
ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा आँख खुलते ही चाँद सा देखा, कियारियाँ धूल से अटी पाईं
बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले ये हमसफ़र मेरे कितने गुरेज़ पा निकले, चले थे और किसी
नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार भी तो नहीं,
तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं, तेरे