ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई

ye bhi kya shaam e mulaqaat aayee

ये भी क्या शाम ए मुलाक़ात आई लब पे मुश्किल से तेरी बात आई, सुब्ह से चुप हैं

हुस्न को दिल में छुपा कर देखो

husn ko dil me chhupa kar dekho

हुस्न को दिल में छुपा कर देखो ध्यान की शम्अ’ जला कर देखो, क्या ख़बर कोई दफ़ीना मिल

ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो

ye raat tumhari hai chamakate raho taaro

ये रात तुम्हारी है चमकते रहो तारो वो आएँ न आएँ मगर उम्मीद न हारो, शायद किसी मंज़िल

नए देस का रंग नया था

naye des ka rang naya tha

नए देस का रंग नया था धरती से आकाश मिला था, दूर के दरियाओं का सोना हरे समुंदर

कोई और है नहीं तो नहीं मे रू ब रू कोई और है

koi aur hai nahi to nahi me ru ba ru koi aur hai

कोई और है नहीं तो नहीं मे रू ब रू कोई और है बड़ी देर मैं तुझे देख

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा

zabaan sukhan ko sukhan baankpan ko tarsega

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही

मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले

mumkin nahi mataa e sukhan mujh se chheen le

मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कुंज ए चमन मुझ से छीन

फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के

phool khushboo se juda hai ab ke

फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के यारो ये कैसी हवा है अब के ? दोस्त बिछड़े हैं

पत्थर का वो शहर भी क्या था

patthar ka wo shahar bhi kya tha

पत्थर का वो शहर भी क्या था शहर के नीचे शहर बसा था, पेड़ भी पत्थर फूल भी

सुनाता है कोई भोली कहानी

sunaata hai koi bholee kahani

सुनाता है कोई भोली कहानी महकते मीठे दरियाओं का पानी, यहाँ जंगल थे आबादी से पहले सुना है