साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन

saaz e hastee kee sadaa gaur se sun

साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन क्यूँ है ये शोर बपा ग़ौर से सुन, दिन के

ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा

khwaab me raat hum ne kya dekha

ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा आँख खुलते ही चाँद सा देखा, कियारियाँ धूल से अटी पाईं

बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले

bane banaaye hue rasto pe jaa nikale

बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले ये हमसफ़र मेरे कितने गुरेज़ पा निकले, चले थे और किसी

नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं

naseeb e ishq dil e be qarar bhi to nahi

नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार भी तो नहीं,

तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं

teri nigaah ke jaadoo bikharte jaate hain

तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं, तेरे

दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई

dafaatan dil me kisi yaad ne lee angdaaee

दफ़अ’तन दिल में किसी याद ने ली अंगड़ाई इस ख़राबे में ये दीवार कहाँ से आई ? आज

कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश

kaarwaan sust raahbar khamosh

कारवाँ सुस्त राहबर ख़ामोश कैसे गुज़रेगा ये सफ़र ख़ामोश, तुझे कहना है कुछ मगर ख़ामोश देख और देख

ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे

ye shab ye khyaal o khwab tere

ये शब ये ख़याल ओ ख़्वाब तेरे क्या फूल खिले हैं मुँह अँधेरे, शोले में है एक रंग

किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है

kisi ka dard ho dil be qarar apna hai

किसी का दर्द हो दिल बे क़रार अपना है हवा कहीं की हो सीना फ़िगार अपना है, हो

इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है

in sahme hue shaharon kee fazaa kuch kahti hai

इन सहमे हुए शहरों की फ़ज़ा कुछ कहती है कभी तुम भी सुनो ये धरती क्या कुछ कहती