रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई

rassi to jal gayi magar aiethan nahi gayi

रस्सी तो जल गई मगर ऐंठन नहीं गई चाहत तुम्हारी यूँ दम ए कुश्तन नहीं गई, तुम चाहते

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए

badh kar kisi se haath milaane nahi gaye

बढ़ कर किसी से हाथ मिलाने नहीं गए तेवर वही हैं अब भी पुराने नहीं गए, दालान अपनी

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे

chuna tha un kee mohabbat ne aazmaa ke mujhe

चुना था उन की मोहब्बत ने आज़मा के मुझे सुपुर्द ए ख़ाक किया आदमी बना के मुझे, मैं

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी

shama se ye kah rahi hai khaaq e parwana abhi

शमअ से ये कह रही है ख़ाक ए परवाना अभी रात आख़िर हो गई बाक़ी है अफ़्साना अभी,

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा ?

mohabbat me shab e tareeq e hizraan kaun dekhega

मोहब्बत में शब ए तारीक ए हिज्राँ कौन देखेगा हमीं देखेंगे ये ख़्वाब ए परेशाँ कौन देखेगा ?

मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है

mohabbat ehtimam e daar bhi hai

मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है मोहब्बत मिस्र का बाज़ार भी है, मोहब्बत मुस्तक़िल आज़ार भी है ये

रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़

rukh har ek teer e nazar ka hai mere dil kee taraf

रुख़ हर एक तीर ए नज़र का है मेरे दिल की तरफ़ आने वाले आ रहे हैं अपनी

हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे

hazar ranj ho dil laakh dard mand rahe

हज़ार रंज हो दिल लाख दर्द मंद रहे ख़याल पस्त न हो हौसला बुलंद रहे, ग़म ए फ़िराक़

दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती

dalayel se khuda tak aql e insani nahin jaati

दलाएल से ख़ुदा तक अक़्ल ए इंसानी नहीं जाती वो एक ऐसी हक़ीक़त है जो पहचानी नहीं जाती,

तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी

tum se vabasta hai meri maut meri zindagi

तुम से वाबस्ता है मेरी मौत मेरी ज़िंदगी जिस्म से अपने कभी साया जुदा होता नहीं, इस तरह