वो जो दिख रहा है सच हो ये ज़रूरी तो नहीं है
वो जो तुम कहते हो हक़ हो ज़रूरी तो नहीं है,
अगर अधूरी रहे कहानी तो रहने दो अधूरी ही
हमेशा पूरी हो हर कहानी ये ज़रूरी तो नहीं है,
जब फिराक़ ही है हासिल इस ज़िन्दगी का
तो हर बार ही हो वस्ल ये ज़रूरी तो नहीं है,
जो ढल रहा है अगर सूरज तो ढलने दो उसे
शब ओ रोज़ हो रौशनी कोई ज़रूरी तो नहीं है,
कम हो रही है अब मेरे इन आँखों की बिनाई
याद रहे हर चेहरा ओ शख्स ज़रूरी तो नहीं है,
अमूमन बे मुरौत होना भी ज़रूरी है मुहब्बत में
हमेशा हम ही रखे रवादारी ये ज़रूरी तो नहीं है,
दे दिया करो कभी इमदाद मुफ़लिस को भी ज़रा
सिर्फ़ मस्ज़िद में ही हो इमदाद ये ज़रूरी तो नहीं है,
शिकस्त भी ज़रूरी है सबक़ ए ज़िन्दगी के लिए
हर बार मिले फक़त फ़तह ये ज़रूरी तो नहीं है..!!
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