यहाँ किसे ख़बर है कि ये उम्र बस
इसी पे गौर करने में कट रही है,
कि ये उदासियाँ किस सबब से
बस हमसे ही लिपट रही है,
दुःख तो ये है कि उसके हो कर भी
हम उसको छूने से डर रहे है,
अज़ीब दुःख है कि हमारे हिस्से की
आग भी अब औरो में बट रही है,
मैं उसको हर रोज़ बस यही एक
झूठ सुनने को फोन करता हूँ,
सुनो ! यहाँ ज़रूर कोई मसला है
आज भी तुम्हारी आवाज़ कट रही है,
दूर सहराओं में पेड़ो के सूखने
और सब्ज़ होने से क्या किसी को ?
ये बेल शायद किसी मुसीबत में है
जो आज यूँ मुझ से लिपट रही है..!!
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