अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें…

अब ज़िन्दगी पे हो गई भारी शरारतें
तन्हाइयो ने छीन ली सारी शरारतें,

होंठो के गुलिस्तान पे लाली न जब रही
आँखों ने खेल खेल में हारी शरारतें,

कुछ तो गले का तौक है यादों की राह में
कुछ आँसूओ में है अभी ज़ारी शरारतें,

सीने से आरज़ूओ के मौसम गुज़र गए
बस रह गई है दर्द की मारी शरारतें,

उड़ने न पाए देखना आह ओ फ़ुगा की धुल
हों जो कभी गुमान पे तारी शरारतें,

दुश्मनों में इश्क का इम्कान अब कहाँ
हमने गम ए जहाँ पे है वारी शरारतें..!!

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