ख़बर क्या थी कि ऐसे अज़ाब उतरेंगे
जो होंगे बाँझ वो आँखों में ख़्वाब उतरेंगे,
सजेंगे ज़िस्म पे कुछ पैरहन गुनाहों के
जो दिल पे नक्श थे सारे सवाब उतरेंगे,
कड़कती धूप के जलते सफ़र में मैं तन्हा
चलूँ तो, आँख में लेकिन सराब उतरेंगे,
चलेगी शहर ए तमन्ना में हिज़्र की आँधी
तमाम कच्चे घड़ो पर चनाब उतरेंगे,
न जाने साँस में कितने ही रंग महकेंगे
जब उसके लम्स के मुझ पर गुलाब उतरेंगे,
यारो ! उनके लिए ज़िन्दगी का पढ़ना क्या ?
जो ले के दर्द ओ अलम की क़िताब उतरेंगे..!!
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