मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे
ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,
मेरी तरफ से हुई है खताएँ
ऐबों पर सत्तारी का एक लिहाफ़ कर दे,
तेरी तरफ़ से हुई है अताएँ
नेमतों पर शुक्र का एक गिलाफ़ कर दे,
दुनियाँ भी बनाएँ लोगो को मनाएँ
आखिरत भी मेरी तू एह्दाफ़ कर दे,
ना दुखाएँ नवाब दिल किसी का
ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!!
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न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़

आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे…

यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने…

अपनी खताओ पे शर्मिन्दा भी हो जाता हूँ

आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद…

किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में

ज़िंदगी तू ने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं

वो काश मान लेता कभी हमसफ़र मुझे

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो
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