मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे
ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,
मेरी तरफ से हुई है खताएँ
ऐबों पर सत्तारी का एक लिहाफ़ कर दे,
तेरी तरफ़ से हुई है अताएँ
नेमतों पर शुक्र का एक गिलाफ़ कर दे,
दुनियाँ भी बनाएँ लोगो को मनाएँ
आखिरत भी मेरी तू एह्दाफ़ कर दे,
ना दुखाएँ नवाब दिल किसी का
ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!!
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

यूँ तेरे हुस्न की तस्वीर ग़ज़ल में आए

अब रहा क्या जो लुटाना रह गया

कोई नहीं आता समझाने अब आराम से हैं दीवाने…

उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से

एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया

बदन और रूह में झगड़ा पड़ा है

मुबारक़ हो ! अहल ए वतन क्या ख़ूब…

उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला…

यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है


















