मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे
ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,
मेरी तरफ से हुई है खताएँ
ऐबों पर सत्तारी का एक लिहाफ़ कर दे,
तेरी तरफ़ से हुई है अताएँ
नेमतों पर शुक्र का एक गिलाफ़ कर दे,
दुनियाँ भी बनाएँ लोगो को मनाएँ
आखिरत भी मेरी तू एह्दाफ़ कर दे,
ना दुखाएँ नवाब दिल किसी का
ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!!
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ज़ौक़ ए गुनाह ओ अज़्म ए पशेमाँ लिए हुए

चाँद है ज़ेर ए क़दम सूरज खिलौना…

ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है…

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है

एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम…

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये…

हमारे खून में अब तक ये बीमारी नहीं आई…

फिरे राह से वो यहाँ आते आते

तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है

हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे है मुझे
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