मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे
ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,
मेरी तरफ से हुई है खताएँ
ऐबों पर सत्तारी का एक लिहाफ़ कर दे,
तेरी तरफ़ से हुई है अताएँ
नेमतों पर शुक्र का एक गिलाफ़ कर दे,
दुनियाँ भी बनाएँ लोगो को मनाएँ
आखिरत भी मेरी तू एह्दाफ़ कर दे,
ना दुखाएँ नवाब दिल किसी का
ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!!
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जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर…

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर

यूँ तो हँसते हुए लड़कों को भी ग़म होता है

उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं…

नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह…

शाम से आँख में नमी सी है

एक वो इतने खूबरू तौबा…

नींद नहीं आती कितनी अकेली हो गई

उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा…

आयत ए हिज्र पढ़ी और रिहाई पाई
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