तुझे पुकारा है बे इरादा

तुझे पुकारा है बे इरादा
जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा,

नदीम हो तेरा हर्फ़ ए शीरीं
तो रंग पर आए रंग ए बादा,

अता करो इक अदा ए दैरीं
तो अश्क से तर करें लिबादा,

न जाने किस दिन से मुंतज़िर है
दिल ए सर ए रह गुज़र फ़ितादा,

कि एक दिन फिर नज़र में आए
वो बाम ए रौशन वो दर कुशादा,

वो आए पुर्सिश को फिर सजाए
क़बा ए रंगीं अदा ए सादा..!!

~फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


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