हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे
हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ जाएँगे,

जो भी है दुनियाँ में एक दिन सब फ़ना होगा
जो महव ए आराइश है वो भी मिट्टी हो जाएँगे,

ज़रा देखो जहाँ से शान वाले मिट गए कितने
ना उनके नाम बाक़ी है न पूरे हो सके सपने,

जो आजिज़ हो औरो के कभी क्या काम आएँगे
अज़ाब ए क़ब्र से बचाने को बस आमाल जाएँगे,

बदी वो खोटे सिक्के है जो बदनामी दिलाएँगे
आखिरत में बस नेकी के सिक्के ही काम आएँगे,

जो तोशे आखिरत के होंगे वही बस रंग लाएँगे
रहेगी ज़ात ख़ुदा की बाक़ी सब फ़ना हो जाएँगे..!!

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