हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ?

Bazmeshayari_512X512

हवा ए शाम ! ज़रा सा क़याम होगा न ?चिराग़ ए जाँ को जलाओ, क़लाम होगा न ?

अब तेरी याद से वहशत नहीं होती मुझ को…

Bazmeshayari_512X512

अब तेरी याद से वहशत नहीं होती मुझ कोज़ख़्म खुलते हैं अज़िय्यत नहीं होती मुझ को, अब कोई

जाते जाते वो हमको रुला कर चला गया…

Bazmeshayari_512X512

जाते जाते वो हमको रुला कर चला गयागम की आँधी से सामना कर कर चला गया, वो हमेशा

कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों से…

Bazmeshayari_512X512

कोई सिपाही नहीं बच सका निशानों सेगली में तीर बरसते रहे मकानों से, ये बर्बादी अचानक से थोड़ी

उल्फ़त की नज़र से हमें एक बार तो देखो…

Bazmeshayari_512X512

उल्फ़त की नज़र से हमें एक बार तो देखोकरते है क्या क्या तुम पे निसार तो देखो, जज़्बे

जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते है…

Bazmeshayari_512X512

जान ओ दिल हम उन्ही पे निसार करते हैहाँ है इक़रार सिर्फ उन्हें ही प्यार करते है, बंद

भाइयो में फ़साद क्या करूँ मैं…??

Bazmeshayari_512X512

भाइयो में फ़साद क्या करूँ मैंबाप की ज़ायदाद क्या करूँ मैं, जिन में चुप रहने की नसीहत होऐसे

मेरे दिल में मुहब्बत ज़रा देखिए…

Bazmeshayari_512X512

मेरे दिल में मुहब्बत ज़रा देखिएचश्म ए पुरनम से मेरी वफ़ा देखिए, छोड़ जाएँगे मुझको ये एहसास हैजाते

जाने कितने रकीब रहते है…

Bazmeshayari_512X512

जाने कितने रकीब रहते हैज़िन्दगी के क़रीब रहते है, मेरी सोचो के आस्तां से परेमेरे अपने हबीब रहते

ग़ज़ल की शक्ल में एक बात है सुनाने की…

Bazmeshayari_512X512

ग़ज़ल की शक्ल में एक बात है सुनाने कीएक उसका नाम है वजह मुस्कुराने की, इस तरह राब्ता