बहुत रोया वो हमको याद कर के
हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के,
पलट कर फिर यही आ जाएँगे हम
वो देखे तो हमें आज़ाद कर के,
रिहाई की कोई सूरत नहीं है
मगर हाँ मिन्नत ए सैयाद कर के,
बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन
गया है रूह को आबाद कर के,
हर आमिर तूल देना चाहता है
मुक़र्रर ज़ुल्म की मियाद कर के
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