लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ?

लोग कैसे है यहाँ के ? ये नगर कैसा है ?
उनकी जादू भरी बातों में असर कैसा है ?

डूबने वाले को बाहर तो निकल आने दो
बाद में पूछते रहना कि भँवर कैसा है ?

क्या बता पाएँगे ये फूटपाथ पे सोने वाले
कोई पूछे भी अगर उनसे कि घर कैसा है ?

आंधियाँ रुकते ही देखेंगे चमन में जा कर
जिसकी कमज़ोर जड़ें थी वो शज़र कैसा है ?

चाँद से चेहरे पे कल जिस के ख़राश आई थी
माना दुश्मन था, बताओ तो मगर कैसा है ?


Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply