रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं

rishton ke jab taar uljhane l

रिश्तों के जब तार उलझने लगते हैं आपस में घर बार उलझने लगते हैं, माज़ी की आँखों में

चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं

chaman me jab bhi saba

चमन में जब भी सबा को गुलाब पूछते हैं तुम्हारी आँख का अहवाल ख़्वाब पूछते हैं, कहाँ कहाँ

हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है

haris dil ne zamana kaseer

हरिस दिल ने ज़माना कसीर बेचा है किसी ने जिस्म किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशीरत

असर उसको ज़रा नहीं होता

asar usko zara naho hota

असर उसको ज़रा नहीं होता रंज राहत फिज़ा नहीं होता, बेवफा कहने की शिकायत है तो भी वादा

शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते

shikast e zarf ko pindaar e

शिक़स्त ए ज़र्फ़ को पिंदार ए रिंदाना नहीं कहते जो मांगे से मिले हम उसको पैमाना नहीं कहते,

मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते

milne ka bhi aakhir koi

मिलने का भी आख़िर कोई इम्कान बनाते मुश्किल थी अगर कोई तो आसान बनाते, रखते कहीं खिड़की कहीं

दिल दे कर संगदिल को…

dil de kar sangdil ko

दिल दे कर संगदिल को ज़िन्दगी दुश्वार नहीं करना यूँ हर किसी से अपने इश्क़ का इजहार नहीं

सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ

satate ho tum mazlumon ko

सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ मगर ये समझ के ज़रा ज़ुल्म ढहाओ मज़ालिम का लबरेज़ जब जाम

तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी…

taqdeer ki gardish kya kam thi

तक़दीर की ग़र्दिश क्या कम थी उस पर ये क़यामत कर बैठे, बेताबी ए दिल जब हद से

पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही…

pichle zakhmon ka izaala

पिछले ज़ख़्मों का इज़ाला न ही वहशत करेगा तुझ से वाक़िफ़ हूँ मेरी जाँ तू मोहब्बत करेगा, मैं