कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर

kaun munsaf kahan insaf

कौन मुन्सफ़, कहाँ इंसाफ़, किधर का दस्तूर अब ये मिज़ान सजावट के सिवा कुछ भी नहीं, अदालत की

अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते

apni khuddari to pamaal nahi kar sakte

अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते, सीम जाएगा

बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना

baaraha tujh se kaa tha

बारहा तुझ से कहा था मुझे अपना न बना अब मुझे छोड़ के दुनिया में तमाशा न बना,

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा

insaaf se na mahrum

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा दुनियाँ में जो जैसा करेगा, वो वैसा ही भरेगा, कागज़

ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे

khuda se waqt e dua

ख़ुदा से वक़्त ए दुआ हम सवाल कर बैठे वो बुत भी दिल को ज़रा अब संभाल कर

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर

khoon se likhta hai taavij e azal

ख़ून से लिखता है तावीज़ ए अजल काग़ज़ पर वक़्त करता है अजब सिफली अमल काग़ज़ पर, रंज

कोई आहट कोई सरगोशी…

koi aahat koi sargoshi sada kuch bhi

कोई आहट कोई सरगोशी सदा कुछ भी नहीं घर में एक बेहिस ख़मोशी के सिवा कुछ भी नहीं,

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं

mat bura usko kaho

मत बुरा उसको कहो गरचे वो अच्छा भी नहीं वो न होता तो ग़ज़ल मैं कभी कहता भी

ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो

zakhm e waahid ne jise

ज़ख्म ए वाहिद ने जिसे ता उम्र रुलाया हो हरगिज़ ना दुखाना दिल जो चोट खाया हो, जिसे

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़

zindagaani ke kaam ek taraf

ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़ अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़, हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़ साज़ो सामां