रात भी, नींद भी, कहानी भी…
रात भी, नींद भी, कहानी भीहाय, क्या चीज़ है जवानी भी एक पैग़ाम-ए-ज़िन्दगानी भीआशिक़ी मर्गे-नागहानी भी इस अदा
Gazals
रात भी, नींद भी, कहानी भीहाय, क्या चीज़ है जवानी भी एक पैग़ाम-ए-ज़िन्दगानी भीआशिक़ी मर्गे-नागहानी भी इस अदा
खो न जाए कहीं हर ख़्वाब सदाओं की तरहज़िंदगी महव-ए-तजस्सुस है हवाओं की तरह टूट जाए न कहीं
कब तक यूँ बहारों में, पतझड़ का चलन होगाकलियों की चिता होगी, फूलों का हवन होगा, हर धर्म
मेरे ख़ुदा मैं अपने ख़यालों को क्या करूँअंधों के इस नगर में उजालों को क्या करूँ ? चलना
हौसले गम से लड़ गए मेरेअश्क मुश्किल में पड़ गए मेरे, मैंने हिज़रत का बीज क्या बोयापाँव जड़
इश्क उनसे हुआ देखते देखतेहुस्न पर मर मिटा देखते देखते, कातिलाना अदा रोग देकर गईबेख़बर फ़िर रहा देखते
साथ मुझको ही पाओगे जिधर जाओगेइससे ज्यादा तुम्हे चाहा तो बिगड़ जाओगे, दिल ए नादान ने किया फिर
चलो मौत को गले लगा कर देखेज़िन्दगी से पीछा छुड़ा कर देखे, घुट घुट कर जीने से बारहा
सोचा कि ख़ुद पे ज़रा सी इनायत कर लूँऐ ज़िन्दगी तुझसे वो पहली सी मुहब्बत कर लूँ, सुनाऊँ
मैं सोचो के किस गुमाँ में थामैं किसी दूसरे जहान में था, रहने वाले आबाद हो न सकेकोई