कोई अज़्म-ओ-इरादा, नहीं चाहिए
आपसे कोई वादा, नहीं चाहिए,
आपकी रुह में, इश्क़ बनकर रहूँ
इससे कुछ भी ज़ियादा, नहीं चाहिए
~ आँचल सक्सैना
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अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की…

सहर जब मुस्कुराई तब कहीं तारों को नींद आई

है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए

ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को

देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते

मज़लूमों के हक़ मे अब आवाज़…

किस्से मेरी उल्फ़त के जो मर्क़ूम है सारे…

अजब है रंग ए चमन जा ब जा उदासी है

इस तसल्ली से बरसते है आँसू तेरे सामने…

जो दिख रहा है उसी के अंदर जो…













