तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की…
तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की ?
Life Poetry
तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की ?
सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है, काई सी जम गई है
शाम से आज साँस भारी है बे क़रारी सी बे क़रारी है, आपके बाद हर घड़ी हमने आपके
ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पीये जाते है हम बहरहाल सलीक़े से जीये जाते है, एक
कितना बेकार तमन्ना का सफ़र होता है कल की उम्मीद पे हर आज बसर होता है, यूँ मैं
इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या
उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज़ हूँ ग़ालिब की सहेली, दक्कन के
थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली इन बस्तियों में हमको रफ़ाक़त नहीं मिली, अबतक हूँ इस गुमाँ
अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत
तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम