हौसले गम से लड़ गए मेरे…
हौसले गम से लड़ गए मेरेअश्क मुश्किल में पड़ गए मेरे, मैंने हिज़रत का बीज क्या बोयापाँव जड़
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हौसले गम से लड़ गए मेरेअश्क मुश्किल में पड़ गए मेरे, मैंने हिज़रत का बीज क्या बोयापाँव जड़
इश्क उनसे हुआ देखते देखतेहुस्न पर मर मिटा देखते देखते, कातिलाना अदा रोग देकर गईबेख़बर फ़िर रहा देखते
साथ मुझको ही पाओगे जिधर जाओगेइससे ज्यादा तुम्हे चाहा तो बिगड़ जाओगे, दिल ए नादान ने किया फिर
चलो मौत को गले लगा कर देखेज़िन्दगी से पीछा छुड़ा कर देखे, घुट घुट कर जीने से बारहा
सोचा कि ख़ुद पे ज़रा सी इनायत कर लूँऐ ज़िन्दगी तुझसे वो पहली सी मुहब्बत कर लूँ, सुनाऊँ
मैं सोचो के किस गुमाँ में थामैं किसी दूसरे जहान में था, रहने वाले आबाद हो न सकेकोई
सब्ज़ गुम्बद से सदा आती हैमुझको वो ताज़ा हवा आती है, चाँद भी तब ही चमक उठता हैजब
बैठ कर पास मेरे एक चिड़ियाँ ने आज ये सवाल कियाहम तो ठहरे परिंदे, इन्सान ने इन्सान का
ये जो आवाम में फ़िक्र ए आम है सियासतमेरे मुल्क की तो बिल्कुल खाम है सियासत, नफ़रत का
इन्सान भूल चुका है इन्सान की क़ीमतबाज़ार में बढ़ गई आज हैवान की क़ीमत, इक्तिदार में आते है