जिसको देखो वही इक्तिदार चाहता है
यार चाहता है प्रोटोकॉल मर्ज़ी का,
हर कोई चाहता है बनना सियासतदाँ
सियासत की आड़ में कारोबार चाहता है,
उसको क्या गरज़ कोई जिये या मरे
वो बस अपना घर गुलज़ार चाहता है,
विदेशी मुल्कों के दौरे कौमी खज़ाने पर
बस हर सूरत मुल्क को लूटना यार चाहता है,
ख़ुदा गारत करे ऐसे वतन के दुश्मन को
जो पूरे करने अपने शौक हज़ार चाहता है..!!
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