ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा…

ज़िन्दगी का बोझ उठाना पड़ेगा
गर ज़िन्दा हो तो दिखाना पड़ेगा,

लगने लगे जो मसला ये ज़िन्दगी
तो ख़ुद से ही सुलझाना पड़ेगा,

ज़िन्दगी है ज़िन्दगी में कभी कभी
तुम्हे रोते हुए भी मुस्कुराना पड़ेगा,

कर ले कमाई वक़्त रहते हुए
नहीं तो उम्र भर पछताना पड़ेगा,

कैसे ज़िन्दा रहना है जहाँ में तुम्हे
हुनर ये ख़ुद को सिखाना पड़ेगा,

मज़बूरी में या ख़ुशी से ही सही
हर फ़र्ज़ तुम्हे अपना निभाना पड़ेगा,

उजड़ा उजड़ा हुआ जँचता ही नहीं
दिल की बगिया को भी सजाना पड़ेगा..!!


Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply