जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ

javaan ho khush adaa ho

जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ हसीं हो दिलरुबा हो इस लिए तारीफ़ करता

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी

jhagadna kaahe ka mere bhai

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी ये बाप दादा की सब कमाई पड़ी रहेगी, अंधेरे कमरों

मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है…

maut bhi kya azib hasti hai

मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है जो ज़िंदगी के लिए तरसती है, दिल तो एक शहर है जुदाई

पिछले बरस तुम साथ थे मेरे…

pichhle baras tum saath the

पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था,

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए

gam e jahan ko sharmsaar

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए वो सारी उम्र इंतिज़ार करने वाले क्या हुए ?

हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत

harf e galat na tha

हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत लिखा गया गलत कभी बोला गया गलत, मैं भी

दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं

dil me auro ke liye kina o kad

दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं वही लोग इख़्लास के पर्दे में हसद रखते

इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है

insan ko waqt ke hisab se

इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है बाद ठोकर ही सही आख़िर संभलना पड़ता है, हमदर्द

सरहदों पर है अपने जवानों का गम

sarhadon par hai apne

सरहदों पर है अपने जवानों का गम और बस्ती में जलते मकानों का गम, फिर से ये गंदी

जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है

jis tarah chadhta hai usi tarah

जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है चोटियों पर सदा के लिए कौन ठहरता है ? बहुत