जो रहता है दिल के क़रीब
अक्सर वही दूर हुआ करता है,
जो नहीं हो मयस्सर हमको
वही मतलूब हुआ करता है,
जिसे पाना मुहाल हो ये दिल
उसे ही पाने की दुआ करता है..!!
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं

ऐसा लगता है समझदार है दुनिया सारी

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना

अब भला छोड़ के घर क्या करते…

वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..

ढूँढ़ते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है…

पड़ा हुआ मैं किसी आइने के घर में हूँ

ये शहर सेहर ज़दा है सदा किसी की नहीं


















