जो रहता है दिल के क़रीब
अक्सर वही दूर हुआ करता है,
जो नहीं हो मयस्सर हमको
वही मतलूब हुआ करता है,
जिसे पाना मुहाल हो ये दिल
उसे ही पाने की दुआ करता है..!!
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तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता

हो रहे हैं रात के दियों के हर सू एहतिमाम

संभाला होश है जबसे मुक़द्दर सख्त तर निकला…

मैं वो दरख़्त हूँ खाता है जो भी फल मेरे

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने

न मिलता ग़म तो बर्बादी के अफ़्साने कहाँ जाते

न घर है कोई न सामान कुछ रहा बाक़ी

सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए

उस ने जब हँस के नमस्कार किया

माना कि अब तुम्हारा दिल भर गया होगा…



















