जो रहता है दिल के क़रीब
अक्सर वही दूर हुआ करता है,
जो नहीं हो मयस्सर हमको
वही मतलूब हुआ करता है,
जिसे पाना मुहाल हो ये दिल
उसे ही पाने की दुआ करता है..!!
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सहराओं से आने वाली हवाओं में रेत है

ऐ दोस्त ! तूने दोस्ती का हक़ अदा किया

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं

हिज़ाब तेरे चेहरे पर मैं सजा दूँ…

ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम

धड़कन धड़कन यादों की बारात…

तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा…

दरख्तों से गिरे सूखे हुए पत्ते भी ये इक़रार करते हैं

मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस


















