हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे
बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे,
इसी अंदाज़ से झूमेगा मौसम गाएगी दुनिया
मोहब्बत फिर हसीं होगी नज़ारे फिर जवाँ होंगे,
न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी
हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे..!!
~मजरूह सुल्तानपुरी
मिट्टी की सुराही है
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं






























1 thought on “हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे”