है सफ़र में कारवान बहर ओ बर किस के लिए
हो रहा है एहतिमाम ए ख़ुश्क ओ तर किस के लिए
किस की ख़ातिर ज़ाइक़ों की सख़्तियों में हैं समर
और झुक जाती है शाख़ ए बारवर किस के लिए
किस की ख़ातिर हैं बदलते मौसमों की बारिशें
दिल ग़मीं किस के लिए है चश्म तर किस के लिए
रतजगों में गूँजने वाली सदाएँ किस की हैं
है हुनर किस के लिए अर्ज़ ए हुनर किस के लिए
किस ने ज़ख़्म ए ना रसी से भर दिए हैं रास्ते
चारासाज़ी किस लिए है चारागर किस के लिए
ला मकाँ में कौन रहता है मकाँ में क्या नहीं
दश्त हैं किस के लिए दीवार ओ दर किस के लिए
किस ने रखी हैं हर एक मंज़र में रंगीं साअतें
ख़ल्क़ फ़रमाए गए हैं बे बसर किस के लिए
कौन सुनता है हवाओं की अजब सरगोशियाँ
और जाती हैं हवाएँ दर ब दर किस के लिए..
~मोहम्मद ख़ालिद
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