निराला अजब नकचढ़ा आदमी हूँ
जो तुक की कहो बेतुका आदमी हूँ,
बड़े आदमी तो बड़े चैन से हैं
मुसीबत मेरी मैं खरा आदमी हूँ,
सभी माशाअल्लाह सुब्हानअल्लाह
हो ला हौल मुझ पर मैं क्या आदमी हूँ,
ये बचना बिदकना छटकना मुझी से
मेरी जान मैं तो तेरा आदमी हूँ,
अगर सच है सच्चाई होती है उर्यां
मैं उर्यां बरहना खुला आदमी हूँ,
टटोलो परख लो चलो आज़मा लो
ख़ुदा की क़सम बा ख़ुदा आदमी हूँ,
भरम का भरम लाज की लाज रख लो
था सब को यही वसवसा आदमी हूँ..!!
~शमीम अब्बास
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