चलो आओ हम एक वायदा करें
दिलो में बस अपने मुहब्बत भरे,
वो सब काम जिनसे दुखे दिल कोई
करें अहद अहम वो न हरगिज़ करे,
मिटा दे ज़माने से हम नफरतें
मुहब्बत की खातिर जिएँ और मरे,
हैं इन्सान की दुश्मन ये सारी नफुर
मुहब्बत का हर शू बोला बाला करे,
गुनाहों से सारे करें हम इज्तिनाब
सभी अमल हम सुन्नतो पर करे,
सभी हम पियें ज़ाम ए इश्क़ ए नबी ﷺ
किसी से नहीं बस ख़ुदा से हम डरे..!!
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



















