अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना
कभी अपनी माँ का दिल न दुखाना,
करो अपनी माँ की हमेशा गुलामी
फिर नौकर बनेगा तुम्हारा ज़माना,
गुस्सा न करना कभी अपनी माँ से
हमेशा मुहब्बत से तुम उनको बुलाना,
ख़ुशी से अपनी माँ की हर एक बात मानो
यक़ीनन ज़न्नत में बनेगा तुम्हारा ठिकाना,
चलेगी आसमानों पर तारीफ़ तुम्हारी
कभी अपना गुस्सा न माँ को दिखाना..!!
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मरीज़ ए इश्क़ का मर्ज़ वो बुखार बताते हैं…

अहल ए तूफ़ाँ आओ दिल वालों का अफ़्साना कहें

गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है

यूँ बने सँवरे हुए से फूल हैं गुलज़ार में

यही हाल रहा साक़ी तेरे मयखानों का

इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

रात भी, नींद भी, कहानी भी…

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा
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