अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना
कभी अपनी माँ का दिल न दुखाना,
करो अपनी माँ की हमेशा गुलामी
फिर नौकर बनेगा तुम्हारा ज़माना,
गुस्सा न करना कभी अपनी माँ से
हमेशा मुहब्बत से तुम उनको बुलाना,
ख़ुशी से अपनी माँ की हर एक बात मानो
यक़ीनन ज़न्नत में बनेगा तुम्हारा ठिकाना,
चलेगी आसमानों पर तारीफ़ तुम्हारी
कभी अपना गुस्सा न माँ को दिखाना..!!
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तरसती आँखे, उदास चेहरा, नहीफ़ लहज़ा, बगैर तेरे…

तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहाँ बनाया

जिसके साथ अपनी माँ की दुआ होती है

ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को

बेख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ

दिन एक के बाद एक गुज़रते हुए भी देख

ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी…

दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं

जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे…

कँवल जो वो कनार ए आबजू न हो
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