वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए…

wo muhabbat gayi wo fasane gaye

वो मुहब्बत गई वो फ़साने गए जो खज़ाने थे अपने खज़ाने गए, चाहतो का वो दिलकश ज़माना गया

दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना…

dil jab ghabraye to khud ko ek qissa suna dena

दिल जब घबराये तो ख़ुद को एक क़िस्सा सुना देना ज़िन्दगी कितनी भी मुश्किल क्यूँ ना हो मुस्कुरा

आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो…

aapse kisne kaha swrnim shikhar ban kar dikho

आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखो, चल

जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता…

jab talak lagti nahi hai boliyan mere pita

जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता तब तलक उठती नहीं है डोलिया मेरे पिता, आज भी

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता…

main usko khwab khwab me sada diya karta

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता मैं ख़्वाब ख़्वाब में उस को सदा दिया करता,

अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला…

ab to bas ye jaan hai maula

अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला, गम का कोई निशाँ नहीं है

क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है….

kya aandhiya badi aane wali hai

क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है क्या कुछ बुरा होने वाला है ? इन्सान पहले से कुछ नहीं

क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा’लूम…

kya batate hai isharaat tumhe kya malum

क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा’लूम कितने मश्कूक हैं हालात तुम्हें क्या मा’लूम ? ये उलझते हुए

उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं…

uske nazdik gam e tark e wafa kuch bhi nahi

उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी

उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला…

uski chaah me naam nahi aane wala

उसकी चाह में नाम नहीं आने वाला अब मेरा अंजाम नहीं आने वाला, हुस्न से काम पड़ा है