आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो…

aapse kisne kaha swrnim shikhar ban kar dikho

आपसे किसने कहा स्वर्णिम शिखर बनकर दिखो शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखो, चल

जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता…

jab talak lagti nahi hai boliyan mere pita

जब तलक लगती नहीं है बोलियाँ मेरे पिता तब तलक उठती नहीं है डोलिया मेरे पिता, आज भी

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है…

sukhanwari ka bahana banata rahta hoon

ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है वही होता है जो मंज़ूर ए ख़ुदा होता है,

क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में…

qamar ki wo khurshid tasveer hai

क़मर की वो ख़ुर्शीद तस्वीर है गले में सितारों की ज़ंजीर है, कहाँ पा ए जानाँ कहाँ मेरा

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता…

kis tarah mile koi bahana nahi milta

किस तरह मिलें कोई बहाना नहीं मिलता हम जा नहीं सकते उन्हें आना नहीं मिलता, फिरते हैं वहाँ

घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर…

घर जब बना लिया

घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बग़ैर,

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता…

main usko khwab khwab me sada diya karta

वो जिस का अक्स लहू को जगा दिया करता मैं ख़्वाब ख़्वाब में उस को सदा दिया करता,

अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला…

ab to bas ye jaan hai maula

अब तो बस ये जान है मौला बाक़ी झूठी शान है मौला, गम का कोई निशाँ नहीं है

क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है….

kya aandhiya badi aane wali hai

क्या आँधियाँ बड़ी आने वाली है क्या कुछ बुरा होने वाला है ? इन्सान पहले से कुछ नहीं

क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा’लूम…

kya batate hai isharaat tumhe kya malum

क्या बताते हैं इशारात तुम्हें क्या मा’लूम कितने मश्कूक हैं हालात तुम्हें क्या मा’लूम ? ये उलझते हुए