ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू…

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ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू दरिया की तेज धार को हिम्मत से मोड़

दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए…

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दर्द हो, दुःख हो तो दवा कीजिए फट पड़े आसमां तो क्या कीजिए ? नहीं इलाज़ ए गम

जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी…

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जब लहज़े बदल जाएँ तो वज़ाहते कैसी नयी मयस्सर हो जाएँ तो पुरानी चाहतें कैसी ? वस्ल में

जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो…

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जब भी तुम चाहो मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो,

अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है…

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अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है घबरा कर कोई गलत क़दम उठाना नहीं है, हुनूज़

रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह…

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रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह चाँद निकला है तुझे ढूँढने पागल की तरह, ख़ुश्क पत्तों

एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर…

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एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर जो कर सके तो बाप की चाहत पे बात कर, रखता

है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए…

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है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए जैसे भी हो अब ये मौसम बदलना चाहिए, रोज़ जो चेहरे

वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें…

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वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें कभी रूठना कभी मनाना वो बिखरी सिमटी ख्वाहिशे, वो

उसे मैं क्यूँ बताऊँ…???

उसे मैं क्यूँ बताऊँ

उसे मैं क्यूँ बताऊँ ??? मैंने उसको कितना चाहा है, बताया झूठ हो जाता है, सच्ची बात की