इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है…

is nadi ki dhaar se thandi hawa aati to hai

इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं…

kaise manzar samne aane lage hai

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं, अब तो इस तालाब का पानी

मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी…

maine to bahut dekhe apne bhi paraye bhi

मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी कुछ ज़िन्दगी भी देखी कुछ मौत के साये भी, इस

फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए…

fatah ki sun ke khabar pyar jataane aaye

फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए रूठे हुए थे हमसे यार रिश्तेदार मनाने आए, अच्छे दिन

नसीबो पर नहीं चलते नजीरों पर नहीं चलते…

नसीबो पर नहीं चलते

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते,

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह…

falsafe ishq me pesh aaye sawalo ki tarah

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे

हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है…

haqiqat me nahi kuch bhi dikha hai

हकीक़त में नहीं कुछ भी दिखा है क़िताबो में मगर सब कुछ लिखा है, मुझे समझा के वो

बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है…

basa basaya shahar ab banzar lag raha hai

बसा बसाया शहर अब बंजर लग रहा है चारो ओर उदासियो का मंज़र लग रहा है, जाने अंजाने

रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है…

roj raat ko jab barah ka gajar hota hai

रोज़ जब रात को बारह का गजर होता है यातनाओं के अँधेरे में सफ़र होता है, कोई रहने

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो…

aansoo ho udasi ho khamosh chitkar ho

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो गज़ल कहनी हो तो पहले किसी से प्यार हो, कलम