फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह…

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह,

शीशागर बैठे रहे ज़िक्र ए मसीहा ले कर
और हम टूट गए काँच के प्यालो की तरह,

जब भी अंज़ाम ए मुहब्बत ने पुकारा ख़ुद को
वक़्त ने पेश किया हमें मिशालो की तरह,

ज़िक्र जब होगा मुहब्बत में तबाही का कहीं
याद हम आएँगे दुनियाँ को हवालो की तरह..!!

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