मुख़्तसर बात, बात काफी है…

mukhtasar baat baat kaafi hai

मुख़्तसर बात, बात काफी है एक तेरा साथ, साथ काफी है, वो जो गुज़र जाए तेरे पहलू में

सूरज से यूँ आँख मिलाना…

suraj se yun aankh milana

सूरज से यूँ आँख मिलाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, दुनियाँ से इस्लाम मिटाना मुश्किल क्या नामुमकिन है, मुशरिको

इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल

ishq ne bakhshi hai hame ye saugat

इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल तेरा ही ज़िक्र हमेशा तेरी ही बात मुसलसल,   एक

तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम…

taalluq tark karne se mohabbat

तअल्लुक़ तर्क करने से मोहब्बत कम नहीं होती भड़कती है ये आतिश दिन ब दिन मद्धम नहीं होती,

पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो

pahle janab koi shigufa uchhal do

पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो फिर कर का बोझ गर्दन पर डाल दो, रिश्वत को हक़ समझ

एक बेवा की आस लगती है

ek beva ki aas lagti hai

एक बेवा की आस लगती है ज़िंदगी क्यों उदास लगती है, हर तरफ़ छाई घोर तारीकी रौशनी की

हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा

haqiqaton me badalta sarab

हक़ीक़तों में बदलता सराब चुभने लगा जो बन सका न हक़ीक़त वो ख़्वाब चुभने लगा, सवाल सख़्त हमारा

ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र…

zaban kuch aur kahti hai

ज़बाँ कुछ और कहती है नज़र कुछ और कहती है मगर ये ज़िंदगी की रहगुज़र कुछ और कहती

सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश

sino me agar hoti pyar ki

सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश हाथों में निकलती क्यूँ तलवार की गुंजाइश, पिछड़े हुए गाँव

बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना

baadshahon ko sikhaya hai kalandar hona

बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना आप आसान समझते हैं मुनव्वर होना, एक आँसू भी हुकूमत के लिए