अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है…
अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है घबरा कर कोई गलत क़दम उठाना नहीं है, हुनूज़
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अब भी कहता हूँ कि तुम्हे घबराना नहीं है घबरा कर कोई गलत क़दम उठाना नहीं है, हुनूज़
सोचता हूँ लहू तुम्हारा मैं गरमाऊँ किस तरह ? ऐ मेरी कौम तुम्हे आख़िर मैं जगाऊँ किस तरह
रात पिघली है तेरे सुरमई आँचल की तरह चाँद निकला है तुझे ढूँढने पागल की तरह, ख़ुश्क पत्तों
तुमको वहशत तो सीखा दी है गुज़ारे लायक और कोई हुक्म ? कोई काम हमारे लायक ? माज़रत
एक अनकही, ख़ामोश मुहब्बत पे बात कर जो कर सके तो बाप की चाहत पे बात कर, रखता
मुझे तन्हाई अपनी अब तुम्हारे नाम करना है बहुत मैं थक चुका हूँ अब मुझे आराम करना है,
शादी से पहले हीरो नंबर वन शादी के बाद कुली नंबर वन शादी से पहले मैंने प्यार किया
सियासत ने बदला में’यार मुल्क में हुक्मरानी का देश चलने लगा है पा कर इशारे अमीर घरानों से,
है बहुत अँधेरा अब सूरज निकलना चाहिए जैसे भी हो अब ये मौसम बदलना चाहिए, रोज़ जो चेहरे
संग ए मरमर से तराशा हुआ ये शोख़ बदन इतना दिलकश है कि अपनाने को जी चाहता है,