अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो

azab riwayat hai qaatilon ko

अज़ब रिवायत है क़ातिलों का एहतराम करो गुनाह के बोझ से लदे काँधों को सलाम करो, पहचान गर

दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ

dard ki dhoop dhale gam ke

दर्द की धूप ढले ग़म के ज़माने जाएँ देखिए रूह से कब दाग़ पुराने जाएँ, हम को बस

धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए

dhokhe pe dhokhe is tarah

धोखे पे धोखे इस तरह खाते चले गए हम दुश्मनों को दोस्त बनाते चले गए, हर ज़ख्म ज़िंदगी

अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती

apno se koi baat chhupai nahi jaati

अपनों से कोई बात छुपाई नहीं जाती ग़ैरों को कभी दिल की बताई नहीं जाती, लग जाती है

हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब

hamaare haafize bekar ho gaye

हमारे हाफ़िज़े बेकार हो गए साहिब जवाब और भी दुश्वार हो गए साहिब, उसे भी शौक़ था तस्वीर

तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे

tera lahja teri pahchan mubaraq ho tujhe

तेरा लहजा तेरी पहचान मुबारक हो तुझे तेरी वहशत तेरा हैजान मुबारक हो तुझे, मैं मोहब्बत का पुजारी

मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं

mujhe aarzoo jiski hai

मुझे आरज़ू जिसकी है उसको ही ख़बर नहीं नज़रअंदाज़ कर दूँ ऐसी मेरी कोई नज़र नहीं, मना पाबंदियाँ

इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो

is shahar men kahi hamara bhi

इस शहर में कहीं पे हमारा मकाँ भी हो बाज़ार है तो हम पे कभी मेहरबाँ भी हो,

वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना…

watan se ulfat hai zurm

वतन से उल्फ़त है जुर्म अपना ये जुर्म ता ज़िन्दगी करेंगे है किस की गर्दन पे खून ए

घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे

ghar se agar nikale

घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे, हमने अल्फ़ाज़ को आइना कर दिया