भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया
ग़ज़ाल देख कर वो ख़ुश ख़िराम याद आ गया,

ख़ुदा का शुक्र है कि साँस टूटने से पेशतर
वो शक्ल याद आ गई वो नाम याद आ गया,

वो जिस की ज़ुल्फ़ आँचलों की छाओं को तरस गई
शब ए विसाल उस को एहतिराम याद आ गया,

मैं पिछले दस बरस से तेरे दिल में घर न कर सका
तेरी मुज़ाहिमत से वियतनाम याद आ गया,

मैं आज ईस्टवुड की एक फ़िल्म देख कर हटा
तो मुझ को एक पुराना इंतिक़ाम याद आ गया..!!

~तहज़ीब हाफ़ी

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