बेवफ़ा से भी प्यार होता है

बेवफ़ा से भी प्यार होता है
यार कुछ भी हो यार होता है,

साथ उस के जो है रक़ीब तो क्या
फूल के साथ ख़ार होता है,

जब वो होते हैं सेहन ए गुलशन में
मौसम ए नौ बहार होता है,

काश होते हम उस के फूलों में
उस गले का जो हार होता है,

दोस्त से क्यों भला न खाते फ़रेब
दोस्त पे एतिबार होता है,

जब वो आते नहीं शब ए वादा
मौत का इंतिज़ार होता है,

वस्ल में भी ख़याल ए हिज्र से दिल
बे सुकूँ बे क़रार होता है,

हम बड़े ख़ुश नसीब हैं वर्ना
आप को किस से प्यार होता है,

तीर वो तीर ए नीम कश तो नहीं
दिल के जो आर पार होता है,

हुस्न ए अख़्लाक़ ऐ उरूस ए हयात
सब से अच्छा सिंघार होता है..!!

~पुरनम इलाहाबादी

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