अपनों को नहीं समझा अपना बेगाना समझ कर छोड़ दिया
अफ़्सोस हक़ीक़त को तुम ने अफ़्साना समझ के छोड़ दिया,
तुम ने भी मेरे टूटे दिल की कुछ क़द्र न की क्या ज़ुल्म किया
तुम ने भी मेरा दिल टूटा हुआ पैमाना समझ के छोड़ दिया,
मंदिर को न समझा घर उसका अफ़्सोस बड़ी नादानी की
अल्लाह के घर को ज़ाहिद ने बुतख़ाना समझ के छोड़ दिया,
ऐ हज़रत ए मूसा शुक्र करो तुम को न जलाया ख़ैर हुई
इस शम्अ ने अपने जलवों का परवाना बना के छोड़ दिया,
मरने के बाद भी काम आई दीवानगी अपनी ऐ पुरनम
तुर्बत में फ़रिश्तों ने मुझको दीवाना समझ कर छोड़ दिया..!!
~पुरनम इलाहाबादी