अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना
कभी अपनी माँ का दिल न दुखाना,
करो अपनी माँ की हमेशा गुलामी
फिर नौकर बनेगा तुम्हारा ज़माना,
गुस्सा न करना कभी अपनी माँ से
हमेशा मुहब्बत से तुम उनको बुलाना,
ख़ुशी से अपनी माँ की हर एक बात मानो
यक़ीनन ज़न्नत में बनेगा तुम्हारा ठिकाना,
चलेगी आसमानों पर तारीफ़ तुम्हारी
कभी अपना गुस्सा न माँ को दिखाना..!!
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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते

ख़ुद से इतनी भी अदावत तो नहीं कर सकता

ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है

छुप गया ख़ुर्शीद ए ताबाँ आई दीवाली की शाम

बेलौस हँसी दिखाना, दिल से निभाना हर रिश्ता यहाँ…

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो
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