अगर चाहते हो तुम सदा मुस्कुराना
कभी अपनी माँ का दिल न दुखाना,
करो अपनी माँ की हमेशा गुलामी
फिर नौकर बनेगा तुम्हारा ज़माना,
गुस्सा न करना कभी अपनी माँ से
हमेशा मुहब्बत से तुम उनको बुलाना,
ख़ुशी से अपनी माँ की हर एक बात मानो
यक़ीनन ज़न्नत में बनेगा तुम्हारा ठिकाना,
चलेगी आसमानों पर तारीफ़ तुम्हारी
कभी अपना गुस्सा न माँ को दिखाना..!!
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वो नवाज़िशे वो इनायते वो बिला वजह की शिकायतें…

नेकियों के ज़ुमरे में भी ये काम कर जाओ

हादसों का शहर है संभल जाइए

जिधर देखते है हर तरफ गमो के अम्बार देखते है…

इंसाफ़ से न महरूम अब कोई शख्स रहेगा

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद

ये दिल आवेज़ी ए हयात न हो

अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी


















