कोई अज़्म-ओ-इरादा, नहीं चाहिए
आपसे कोई वादा, नहीं चाहिए,
आपकी रुह में, इश्क़ बनकर रहूँ
इससे कुछ भी ज़ियादा, नहीं चाहिए
~ आँचल सक्सैना
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं

नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा

काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की…

कहीं पे सूखा कहीं चारों सिम्त पानी है

इलाज ए ज़ख़्म ए दिल होता है…

दूर ख्वाबों से मुहब्बत से किनारा कर के

कुछ ज़रूरत से कम किया गया है

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना

सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ?

घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है














