ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती

ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती
चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती,

चली जाती है हँसने और हँसाने से
दवा खाने से बीमारी नहीं जाती,

ज़ियादा सोचने से नींद जाती है
मगर इस से परेशानी नहीं जाती,

मुआ’फ़ी माँ ने दे दी ख़्वाब में आ कर
मगर सर से पशेमानी नहीं जाती,

उसे जाने दिया रोका नहीं मैं ने
कभी उस की ये हैरानी नहीं जाती,

मोहब्बत हो गई तो हो गई आतिश
कभी ये वाली बीमारी नहीं जाती..!!

~आतिश इंदौरी

सब पुराने ख़याल बदलो यार

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