जो रहता है दिल के क़रीब
अक्सर वही दूर हुआ करता है,
जो नहीं हो मयस्सर हमको
वही मतलूब हुआ करता है,
जिसे पाना मुहाल हो ये दिल
उसे ही पाने की दुआ करता है..!!
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अंधेरा ज़ेहन का सम्त ए सफ़र जब खोने लगता है…

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं…

रंग पैराहन का ख़ुशबू ज़ुल्फ़ लहराने का नाम

शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले…

पहलू में बैठ कर वो पाते क्या ?

कुछ कहने का वक़्त नहीं कुछ न कहो ख़ामोश रहो…


















