तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता…

तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता
जहाँ अपने सिवा कोई शख्स मुलाक़ाती नहीं होता,

गिरफ्तार ए इश्क़ ए वफ़ा का कोई एक मौसम रख
जो नाला रोज़ बह निकले वो तो बरसाती नहीं होता,

बिछड़ने का इरादा है तो मुझसे मशविरा कर लो
मुहब्बत का कोई फ़ैसला तन्हा ओ ज़ाती नहीं होता,

तुम्हे इस दिल में जगह दी थी नज़र से दूर क्या करते ?
जो मरकज़ में ठहर जाए वो मुज़ाफाती नहीं होता..!!

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