इस देस का रंग अनोखा था इस देस की बात निराली थी
नग्मो से भरे दरिया थे रवां गीतों से भरी हरियाली थी,
उस शहर से हम आ जाएँगे अश्को के दीप जलाएँगे
ये दर्द भी आने वाला था ये बात भी होने वाली थी,
वो रौशन गलियाँ याद आएँ वो फूल वो कलियाँ याद आएँ
सुन्दर मन छलियाँ याद आएँ, हर आँख मधुर मतवाली थी,
किस बस्ती में आ पहुँचे हम हर गाम पे मिलते है सौ गम
फिर चल उस नगरी में हमदम हर शाम जहाँ उजियाली थी,
वो बाम ओ दर वो रहगुज़र, दिल खाक़ बसर जाँ खाक़ बसर
जालिब वो परेशां हाली भी क्या ख़ूब परेशां हाली थी..!!
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