मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा,

गिरा दिया है तो साहिल पे इंतिज़ार न कर
अगर वो डूब गया है तो दूर निकलेगा,

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़
हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा,

यक़ीं न आए तो एक बात पूछ कर देखो
जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा,

उस आस्तीन से अश्कों को पोछने वाले
उस आस्तीन से ख़ंजर ज़रूर निकलेगा..!!

~अमीर क़ज़लबाश


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