इश्क़ ने बख्शी है हमें ये सौगात मुसलसल
तेरा ही ज़िक्र हमेशा तेरी ही बात मुसलसल,
एक मुद्दत हुई मुझे तेरे कूँचे से निकले हुए
होती रहती है फिर भी मुलाकात मुसलसल,
यादों से दिल्लगी दिल की लगी बन जाती है
जब तसव्वुर में गुजरती है हर रात मुसलसल,
तुम्हारी मुहब्बत में आज उस मुकाम पर हूँ
जहाँ मेरी ज़ात में रहती है तेरी ज़ात मुसलसल..!!
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ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो

ख़ुश्बू मेंरे बदन में रची है ख़लाओं की

हो मोमिनों को हमेशा ही पयाम ए ईद मुबारक

झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शेर सुनाने वाले

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले

तुम मेरी ख्वाहिश नहीं हो….

ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे

होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है

गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है

मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते



















