हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत

हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत
लिखा गया गलत कभी बोला गया गलत,

मैं भी गलत न था मेरी बातें गलत न थीं
मुझको मेरे कलाम को जाँचा गया गलत,

मिज़ान ठीक था पलड़े दुरुस्त थे
लेकिन ये कौन देखता है कि तोला गया गलत,

मुझ में नहीं थे ऐब कसौटी में ऐब था
मेरा था ये क़ुसूर कि परखा गया गलत,

तूफ़ान के बाद अहल ए तदब्बुर को है ये फ़िक्र
साहिल का क़ुसूर था कि दरिया गया गलत ?

अफराद हैं गलत या गलत हैं तसव्वुरात ?
या इस मुशायरे ही को ढाला गया गलत…!!


Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply